Service is Devotion

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The existence of Lord Shiva "Aghor" is believed to be there even before creation of life in universe. Aghor is an ancient spritual discipline and has been practised ever since the early days of Vedic Era. Words like "Aghor", "Aughad", "Kapalik", "Aghori", "Aughar", "Awadhoot" means the same, which is simple and natural state of consciousness.

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गुरु पूर्णिमा महोत्सव 2026

Event Date

29 July 2026

गुरु पूर्णिमा महोत्सव 2026

गुरु पूर्ण माँ यानि गुरुपूर्णिमा । माँ के रूप में उपस्थित गुरु के प्रति शिष्य की अगाध, आस्था और समर्पण का ये पावन पर्व यूँ तो देश के कोने-कोने में मनाया जाता है, लेकिन आध्यात्मिक नगरी काशी में इस पर्व का नज़ारा अदभुत होता है । गुरु के दर्शन को लालायित भक्त समुदाय से काशी के मठ, आश्रम पटे पड़े रहते हैं । पुरातन संस्कृति की झलक जीवंत होती है । ग़ज़ब का आकर्षण होता है । बेमिसाल ।

ख़ास तौर पर दृश्य जब अघोर के विश्वविख्यात सिद्धपीठ, 'बाबा कीनाराम स्थल, क्रीं-कुण्ड', का हो तो छटा निराली ही दिखती है । 29 जुलाई को गुरु पर्व के दिन पूरी दुनिया में अघोर परंपरा के आराध्य-ईष्ट और इस सिद्धपीठ के वर्तमान पीठाधीश्वर , अघोराचार्य महाराजश्री बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी, का दर्शन करने के लिए देश-विदेश से हज़ारों श्रद्धालुओं का आगमन 27 जुलाई की रात से ही शुरु हो गया था , जो 28 जुलाई की देर रात तक जारी रहा ।

29 जुलाई को गुरुपूर्णिमा पर्व पर सुबह 4 बजे से ही हज़ारों श्रद्धालू कतारबद्ध होकर अपने गुरु दर्शन का इंतज़ार करने लगे ।

और ..... जैसे ही अघोराचार्य महाराजश्री बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी अपने कक्ष से बाहर आए, तो , गुरु दर्शन को आतुर भक्तजनों के 'हर हर महादेव' के गगनभेदी उदघोष से पूरा सिद्धपीठ गूँज उठा । और इसके बाद जैसे ही अघोराचार्य अपने विश्वविख्यात औघड़ तख़्त पर विराजमान हुए, भक्तों के बीच उनकी एक झलक पाने की होड़ लग गई । लेकिन बेहद अनुशासित पंक्तिबद्ध भक्तों ने संयमित तरीके से अपने शिव-स्वरुप गुरु अघोराचार्य का दर्शन कर स्वयं को कृतार्थ किया ।

दर्शन पूजन का ये सिलसिला देर शाम तक जारी रहा । बाद में भजन-संध्या के तहत एक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी रखा , जिसमें नामचीन कलाकारों ने अपने फ़न का जादू बिखेरा और भावविभोर भक्तजनों की वाहवाही लूटी । इसके बाद एक वैचारिक गोष्ठी भी आयोजित हुई, जिसमें तमाम विद्ववत जनों ने गुरु पर्व की महिमा का उल्लेख किया ।

कार्यक्रम के अंत में भक्तजनों को दिए गए अपने आशीर्वचन में अघोराचार्य ने राष्ट्रीय -अंतराष्ट्रीय विषम परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त किया । गुरु-शिष्य परम्परा के इस पावन पर्व पर भक्तजनों के धैर्य और समर्पण की सराहना करते हुए बाबा गौतम राम जी ने भक्तों से आग्रह किया कि "आप अपने अवगुणों को छोड़कर गुरु के प्रति अपनी सच्ची श्रद्धा अर्पित कर सकते हैं" ।

उधर भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए आला प्रशासनिक अधिकारी लगातार आश्रम परिसर पर नज़र रखे हुए थे और सुरक्षा के पुख़्ता इंतज़ाम थे ।

आश्रम परिसर के बाहर मेले जैसा माहौल दिखा, और, भक्तजन दर्शन पूजन के बाद मेले का लुत्फ़ उठाते दिखे ।